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सचिन पायलट ने बीजेपी पर लगाया नकारात्मक राजनीति का आरोप

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने बीजेपी पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए बीजेपी जैसे हथकंडे अपना रही है, वे देश में वैमनस्य का वातावरण पैदा कर रहे हैं। पायलट ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा अपनी विचारधारा में राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि देश के खिलाफ बोलने वालों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। देश के खिलाफ नारे लगाने वालों का स्थान सलाखों के पीछे है, लेकिन झूठे तथ्यों के आधार पर किसी का आपराधिकरण करना सियासी लाभ के लिए बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास स्वतंत्रता आन्दोलन से लेकर अब तक देश हित में दी गई कुर्बानियों के लिए जाना जाता है। अंग्रेजी दासता से देश को मुक्त करवाने के दौरान कांग्रेस पूरे देश की भावना अभिव्यक्त करने का काम कर रही थी, जिसके परिणामस्वरूप देश को आजादी मिली और आज के भारत के विकसित स्वरूप को समग्र विकास की नीति के तहत मूर्त रूप दिया गया। पायलट ने कहा कि कांग्रेस के शासन के दौरान पंजाब व जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को नियंत्रित किया गया, लेकिन यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि बीजेपी के वर्तमान शासन में आंतरिक व बाह्य सुरक्षा के साथ समझौता हुआ है। इसी के कारण आतंकवादियों ने दुस्साहसपूर्वक पठानकोट एयरबेस पर हमला किया और हमारे देश के सात जवानों की शाहदत हुई। इतिहास गवाह है कि बीजेपी के विगत शासन के दौरान खूंखार आतंकवादियों को आजाद कर बीजेपी के मंत्री खुद अफगानिस्तान के कंधार में छोडकर आए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समरसतावादी अतीत व वर्तमान से बौखलाकर बीजेपी जिस प्रकार की राजनीति कर रही है वह असहिष्णुता की श्रेणी में आता है। बीजेपी जबरन अपनी विचारधारा को थोपने के लिए देश में अराजकता फैला रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी को जनादेश शासन करने के लिए मिला है न कि अपनी इच्छा थोपने के लिए। उन्होंने कहा कि बीजेपी के अनुसार जो उसकी विचारधारा को मानेगा वही राष्ट्रभक्त है और जो उसकी कुनीतियों का विरोध करेगा वह राष्ट्रद्रोही माना जाएगा। माफियाओं व अपराधियों को संरक्षण देकर आम जनता का दमन करने वाली पार्टी तिरंगा फहराने का निर्देश देकर अपने आपको राष्ट्रवादी घोषित करना चाहती है जबकि देश व प्रदेश में महंगाई, भ्रष्टाचार व अपराध चरम पर हैं, अपराधी अपने कारनामों को सरेआम अंजाम दे रहे हैं और आम आदमी महंगाई के बोझ के तले दबे जा रहा है। महिलाएं उत्पीडन का शिकार होकर अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रही हैं। समाज का दलित वर्ग बीजेपी के राज में शोषण का शिकार हुआ है।...

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भरतपुर में भी आरक्षण की मांग को लेकर जाटों का आंदोलन तेज, बस फूंकी, इंटरनेट पर बैन

 राजस्थान सरकार ने भरतपुर जिले में जाटों के आरक्षण की मांग को तूल पकड़ता देख अगले चौबीस घंटों के लिए वहां मोबाइल इंटरनेट और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया है। पूरे जिले में धारा-144 भी लागू है। कलेक्टर रवि जैन ने अपने आदेश में कहा है कि जाट समुदाय आरक्षण की मांग को लेकर उग्र आंदोलन की रूपरेखा बना रहा है, इसलिए जिले में 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवा और विभिन्न सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया जाता है। मोबाइल और लैंडलाइन पर सिर्फ वॉयस कॉल की इजाजत है। सोमवार को आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने एक बस को जला दिया और आगरा-जयपुर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-11 को भरतपुर के पहले दहला मोड़ पर बाधित कर दिया। पुलिस ने यातायात को बयाना के रास्ते आगरा डाइवर्ट किया। भरतपुर के कुछ गांवों में भी स्टेट हाइवे पर जाम लगाए गए। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए सामाजिक न्याय मंत्री अरुण चतुर्वेदी को बातचीत के लिए भरतपुर भेजा है। राजस्थान में जाट समुदाय को आरक्षण 1999 से मिला हुआ है, लेकिन इसमें धौलपुर और भरतपुर के जाट शामिल नहीं किए गए थे। पिछले साल हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने आरक्षण की मांग की समीक्षा करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग और आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया था।

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राजस्थान यूनिवर्सिटी में चार कश्मीरी छात्रों की कथित तौर पर पिटाई

 चित्तौड़गढ़ की मेवाड़ यूनिवर्सिटी में सोमवार को कथित तौर पर यह घटना घटी। इन चार युवकों पर हमला रोकने के लिए पुलिस को बुलाया गया था। बताया जा रहा है कि कुछ हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए थे और नारेबाजी करने लगे थे। पुलिस का कहना है कि स्थिति तनावपूर्ण बनने से पहले नियंत्रण में कर ली गई। पुलिस ने कहा कि जो कुछ भी वहां पकाया गया था उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने कहा कि हमारे यहां 23 राज्यों के छात्र पढ़ते हैं। इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं कि क्योंकि छात्र अलग-अलग पृष्ठभूमि से आते हैं। बता दें कि मंगलवार को गृहमंत्रालय ने साफ किया कि उसके एक आदेश का गलत अर्थ निकाला गया है जिसके तहत कोलकाता में जम्मू-कश्मीर से पढ़ने के लिए आए छात्रों की प्रोफाइल एकत्र करने को कहा गया था। केंद्र द्वारा जम्मू-कश्मीर के कुछ अभिभावकों द्वारा अपने बच्चों की सुरक्षा चिंता को लेकर राज्यों को यह कहा गया था कि वह अपने अपने राज्यों की विभिन्न यूनिवर्सिटियों में यहां से पढ़ने के लिए आए छात्रों की सुरक्षा की खास व्यवस्था रखें। इस चिट्ठी में खासतौर पर कश्मीरी छात्रों पर जो दिया गया था।

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